जीवन का लक्ष है एकेलेपन से एकान्त तक की सफर तय करना ; जीतनी सचाई के साथ,जीतनी गहराई के साथ यह सफर की जाए उत्ना अच्छा है क्योंकी इस सफर में पथ भी हम ,पथिक भी हम और मंज़िल भी हम ही हैं ....भले कोई रस्ते में मिले या नहीं ,कोई साथ दे या नहीं ,भले कोई हमे समझ पाए या नहीं , भले कहीं कठिनाई आजाए........च ल ना तो हमें नदी की तरह है ........कहीं भटक न जाए ....
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