Thursday, 29 May 2025

तुम आ गए हो ....

तुम आ गए हो ,
मन का दरवाजा खुला है, अंदर आ जाओ,
कोई आहट की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
हवा से कुछ खामोशी उधार ले आओ, 
कोई लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं:

तुम आ गए हो, 
सूरज से कुछ साँसे मांग लाओ, 
कोई तकल्लुफ की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो ,
बहारों से कुछ रंगत चुरा लाओ, 
कोई चमन की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
फ़िज़ाओं से एक मुस्कान ले आओ, 
कोई तारूफ की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
बारिशों से कुछ बूंदे मांग लाओ, 
आंसुओं के जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
माजी से कुछ पन्ने चुरा लाओ, 
कोई पैगाम की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
चाँद से कुछ धड़कन उधार ले आओ, 
कोई लंबी कहानी की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
साहिल से कुछ रेत उठा लाओ, 
सागर में मोती ढूंढने की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
वक्त से कुछ लम्हे चुरा लाओ, 
कोई लंबी सफर की जरूरत नहीं;

तुम आ गए हो, 
घडि-दो घडि यहां बैठ जाओ, 
सदियों की राह देखने की जरूरत नहीं:

तुम आ गए हो, 
कुछ दुआएँ साथ ले जाओ, 
सफर के धूप में साया की जरूरत नहीं....