मन का दरवाजा खुला है, अंदर आ जाओ,
कोई आहट की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
हवा से कुछ खामोशी उधार ले आओ,
कोई लफ़्ज़ों की जरूरत नहीं:
तुम आ गए हो,
सूरज से कुछ साँसे मांग लाओ,
कोई तकल्लुफ की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो ,
बहारों से कुछ रंगत चुरा लाओ,
कोई चमन की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
फ़िज़ाओं से एक मुस्कान ले आओ,
कोई तारूफ की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
बारिशों से कुछ बूंदे मांग लाओ,
आंसुओं के जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
माजी से कुछ पन्ने चुरा लाओ,
कोई पैगाम की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
चाँद से कुछ धड़कन उधार ले आओ,
कोई लंबी कहानी की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
साहिल से कुछ रेत उठा लाओ,
सागर में मोती ढूंढने की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
वक्त से कुछ लम्हे चुरा लाओ,
कोई लंबी सफर की जरूरत नहीं;
तुम आ गए हो,
घडि-दो घडि यहां बैठ जाओ,
सदियों की राह देखने की जरूरत नहीं:
तुम आ गए हो,
कुछ दुआएँ साथ ले जाओ,
सफर के धूप में साया की जरूरत नहीं....
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