अगर मरने से पहले आप से कभी मुलाकात हो गया, तो मुझे जरूर जी भरकर रोने का इजाजत दे देना, शायद इस से मन हल्का हो जा जाए और मैं फिर समुंदर की तरह जीना सीख जाऊँ....
शायद आज जिंदगी से कोई शिकायत नहीं है मुझे, जो थोड़ा रोना आ गया...पता है, जिंदगी में ऐसे बहुत कम वक़्त आते हैं जब कोई रोना चाहे और रो पाए..यह रू के लिए एक संदेश है, उसे जरूर बताना...
उस से यह कह देना, "अरे पगली, क्यूँ परेशान हो रही हो, क्य़ा खोने को डर रही हो, तुम्हारे पास जो कुछ है, वे सब तुम्हारा ही है, 💯 ". पिछले बार जब वह बहुत परेशान थीं, मन करता था, उसे समझा दूँ, "अरे पगली, हम तुम्हें कैसे समझाए, जो शख्स को हम जानते थे, तुम्हारे साथ उनकी कोई ताल्लुक नहीं था, और जो आज तुम्हारा है, उस से तो हम वाकिफ भी नहीं है, वो तुम्हारा है, बिल्कुल तुम्हारा, तुम ने उस पर अपनी जिंदगी न्यौछावर कर दी है, तुम ने उन्हें घर, संसार दी है, उन को दुनिया के सबसे अनोखा तोहफा दी है, माँ बन के उस इंसान को तुम पिता होने का एहसास दिया है ....तुम ने उस की हर ग़म, हर खुशी, हर पल, हर मोड़ के साझेदारी निभायी है "...फिर उसे कोई कैसे तुम से ले जा सकता है. और कुछ हो न हो यह भरोसा तुम मुझ पर बिल्कुल रख सकती हो, मैंने आजतक किसी का भरोसा नहीं तोड़ा है, यह मेरी जिंदगी की आखिरी और सबसे क़ीमती पूंजी है और इस जिंदगी के लिए यही बहुत है...शायद किसी वजह से मैं तुम्हें यह कह न पाऊँ. हो सके तो यह तुम समझ जाना. मेरा एक मानना है, की जो तुम खुद बनाए हो, वह तुम्हारा ही रहता है, कोई उसे क्या ले जाएगा. समुंदर से लेना क्या देना क्या ! लोग कितने अजीब उलझन से जीवन के सुन्दर पल खो देते है. किसी ने सच ही कहा है,
"मैं कल को तलाशते रहा,
और शाम होते होते मेरा आज डूब गया "
आज जो तुम हो, जो कुछ तुम्हारे पास है, साथ है, उस का कद्र करो और हर पल को जितना हो सके जियो, कोई नहीं जानता , जिंदगी में यह जो " है " कब " था " में बदल जाता है. मेरी छोटी-सी यह जिंदगी में एक मामूली समझ है, यह जीवन एक स्रोत है, कौन जाने कौन सी अनंत काल से अपने आप बहती जा रही है, जीवन का अंतिम लक्ष्य है अकेलापन से एकांत तक रास्ता तय करना, वह जितनी सफाई से हो, जितनी गहराई से हो, उतना अच्छा है औऱ यह हम जैसे इंसानों को जितना जल्दी समझ आ जाए उतना अच्छा है. "
कितनी बड़ी सीख है..... मेरी गुजारिश है दोबारा वह गलती कोई और न करें. मेरे तरफ से उस से थोड़ा प्यार दे देना और समझा देना जो आज हमारे पास हैं उस के लिए खुदा के शुक्र करें और मेरी उमर उस से लग जाए. पहले से जिंदगी तुम से बहुत कुछ ले चुकी है, बाकी जो कुछ है, वे सलामत रहें...मुझे कभी कुछ खोने का डर था ही नहीं, देता वह खुदा ही, ले तो वही सकता है. इंसान इंसान को क्या दे सकता न ले सकता है....आजतक दुनिया में ऐसे रईस इंसान पैदा हुआ ही नहीं कि जो उसके सारे जायदाद के बदले बीती हुई एक पल भी खरीद सके..... और आप और हम तो साधारण इंसान है, हम क्या दे सकेंगे, खरीद सकेंगे....मैंने तो एक एहसास के साथ कुछ लम्हे जी लिया जो मेरे अस्तित्व का अंश है, यह कर्ण का कवच-कुंडल भी नहीं जो मैं काट के किसी को दे सकूं. जो मेरे साँसों के साथ साथ सहज चलते हैं, मेरे साथ ही जायेंगे, उस से अधिक मैं क्या कहूँ....यह तो कोई दैवी आशीर्वाद है....
मजे की बात है, अगर जब आप मेरे पास थे तब भी अगर वह वहां आ जाती थीं और आप को चाहती थीं, शायद मैं खुशी खुशी आपको उन्हें सौंप देती...प्यार तो दुनिया की सबसे अनोखा तोहफा है, अगर वह कोई दे पाए, तो उस से बड़ा भाग्य क्या हो सकता है?
उस से यह कहना मेरी तरफ से....." इतना भरोसा मैं तुम्हें दिलाती हूं तुम्हें कभी कोई तकलीफ देना न मेरा मतलब रहेगी न मकसद. ऐसे तो तुम्हारे मेरे ऊपर बड़ा एहसान है,जिंदगी में कुछ नाजुक मोड़ में तुमने ही उनके सहारा बने, प्यार लेने का नाम नहीं, देने का, मगर तुम तभी दे पाओगे जब तुम खुद पूर्ण हो, शायद तुम ने भी कुछ हदतक वही किया है मेरे अंदाज में, तो फिर क्यूँ परेशान हो? "
तुम्हारी उलझन, तुम्हारे परेशानी मुझे ताज्जुब तो नहीं किया था, यह दुनिया की बहुत पहचानी सी दस्तूर है, कोई नया नहीं है, फिर भी थोड़ा निराश तो ज़रूर हुई होगी मैं, क्योंकि मेरा कुछ अलग नजरिए रहे जिंदगी के तरफ, शायद कुछ थोड़ी देर लिए भी हो मैंने यह तुमसे उम्मीद कर ली होगी की तुम शायद मेरी नजरिए से देख भी पाओगे, अंदर एक आवाज भी आई की, .....काश तुम मुझे समझ पाते, काश मैं तुम्हें समझा पाती....
खैर कोई बात नहीं, आज नहीं तो कल, इस जहां में नहीं तो कोई और जहां में शायद तुम यह समझ जाओगे. तब तक के लिए यही दुआ है, कि तुम महफूज रहो, तुम्हारे सुन्दर दुनिया सलामत रहे, तुम्हारे हर ख़ाब पूरी हो जाए, और जो ख़ाब पूरी ना हो वह ख़ाब तुम्हें कभी न आए. "
खुदा हाफिज....