मथुरा के कारागार में जन्मा हूँ...
उस भादों के अंधेरे रात में
कृष्ण पक्ष आठवीं नक्षत्र के
रात के सन्नाटे के आठवीं प्रहर में...
हाँ , मैं वही कृष्ण हूँ...
जन्म होते ही मेरे पिता के कन्धे पर
यमुना पार कर किसी नंद राजा के
आँगन में पहुंचा हूँ...
हाँ मैं वही कृष्ण हूँ
देवकी माँ के कोख से जन्मा
यशोदा माँ के आंगन में खेला हूँ
वहीँ पर पला बढ़ा हूँ
लोग मुझे नटखट कहते थे
शरारती मानते थे
कोई ग्वाला कहा,
कोई माखन चोर भी कह दिया...
किसीने गोपियों का सरताज़ कहा
किसीने तो मुझे रणछोड का
नाम भी दे दिया
फिर किसी ने यह भी पूछ लिया
मैं हूँ सच में किसका ?
मैं देवकी माँ का आठवां पुत्र हूँ
या यशोदा माँ की नयन का पुतला...
क्या जवाब दूँ ?
मैं सच में कौन हूँ
किसका हूँ
क्या मैं मथुरा का रह गया हूँ
या वृंदावन के पास हूँ....
सच तो यह है...
मैं देवकी माँ के
कोख से जन्मा कान्हा हूँ
कारागार में उनके अश्कों का
दाग हूँ,
बेड़ियों में बंधे उनके पैरों के
निशान हूँ,
उनके पीड़ा के साझेदार हूँ...
उतना ही मैं यशोदा माँ की भी रुणी हूँ
उनके आँखों के सपनों में रहा हूँ...
कैसे कहूँ मेरे लिए कौन बड़ा है
कौन छोटा,
कौन कम है कौन ज्यादा...
यह न ही सम्पत्ति है मेरा
ना कोई जायदाद के पिटारा...
यह कैसे किस किस मैं बंटवारा होगा?
कोई नौ महीने के कोख दिए
बेड़ियों के बोझ उठाते उठाते
मुझे धरती पर जन्म दिए...
फिर किसी ने मुझे
सिर्फ़ उसके आंगन नहीं
दिल में ही बसा लिए
आँखों से ओझल हुए
तो अश्कों से नाह लिए...
अब तुम्हीं बताओ दुनिया वाले!
मैं कृष्ण, तुम्हें क्या उत्तर दूँ
मैं किसका था या किसका हूँ
किस का रुणी था या किसका रूणी हूँ...
शायद मैं सदियों से वहीँ था, वहीँ हूँ
वही कृष्ण था, वही कृष्ण हूँ
जितना मैं देवकी माँ का था
उतना ही यशोदा माँ का हूँ...
यह तो विधि के विधान है
कभी वह मथुरा के कारागार के
बंद कोठरी में
देवकी होते हैं
तो कभी नंद की गाँव में
यशो माता कहलाते है...
मैं कृष्ण हूँ
शायद कभी विधाता के हाथ से
देवकी के कोख से जन्म लिया था
तो कभी यशोदा के आंगन में
पला बढ़ा हूँ....
ये दुनिया वाले,
मैं तुम्हें क्या उत्तर दूँ,
कैसे समझाऊं
समझ पाओगे तो आभार है
ना भी समझो तो कोई बात नही है...
मैं वह खुश नसीब इंसान हूँ...
जो देवकी की कोख भी देखा
और यशोदा के गोद में भी खेला
कहीं माधव कहलाया
तो कहीं गिरिधर हो गया...
यहां कोई बड़ा नहीं होता
ना ही कोई छोटा
कान्हा तो भाग्य से कभी
देवकी के हुए तो यशोदा के
कहलाये ....
मगर कर्म से वह शुद्ध हो गए...
देवकी और यशोदा...दोनों में लिन हो गए
कान्हा से कृष्ण हो गए
और दोनों जहां से परे हो गए....
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