Thursday, 6 November 2025

तुम तुम रह गए और हम हम रह गए

कौन कहता है तुम बदल गए 
या हम बदल गए, 
या हम दोनों ही बदल गए....

गलत कौन था या गलती कहाँ हुई 
शायद गलती नहीं 
कोई गलत फहमी हो गई...

धूल चेहरे पर थी 
और तुम जिंदगी भर आईना साफ़ 
करते रहे, 
शायद वही गलत हुआ 
तुम्हें जैसे कोई गलत फ़हमी हो गई...

और हम भी क्या कम जिद्दी थे 
तुम अगर तुम रह गए 
हम भी हम ही रहें 
रत्ती भर भी बदल ना पाए...

जिंदगी भर तुम्हारे लिए 
तुमसे ही लडते रहे 
मगर तुम्हें उसके 
अंदाज भी आने न दिए....

लोग तो अपनों के लिए 
दुनिया के साथ लडते हैं 
हरदम कुछ पाने के लिए 
बैचैन रहते हैं...

कमबख्त हम ही एक थे 
जिनके ऊपर खुदा के 
यह ग़ज़ब मेहरबानी देखिए...

कमबख्त हम भी ऐसे 
ग़ालिब बन गए 
जो जिंदगी भर तुम्हारे लिए 
तुम्हारे साथ लडते रहें...

और कुछ पाने के लिए नहीं 
तुमसे जो अश्कों उधार लाए थे 
वही चुकाने के लिए....

समुंदर में एक चुटकी नमक हो के 
घुल जाने के लिए 
हम खाक हो गए...

तुम तुम ही रह गए...
         और 
हम भी अखिर हम ही रह गए....


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