हम तुमसे प्यार करते की नहीं
और करते तो कितना करते...
हमें बड़ी हंसी आ गई...
तुम्हारे यह बचपना हरकत पर
और मासूमियत अंदाज पर....
अगर " हमें तुमसे मोहब्बत है "
कह देने से मोहब्बत के ज़ज्बात
पूरी हो जाती
और मोहब्बत मुकम्मल हो जाती
और मिसाल कायम कर लेती
तो मीरा- गिरिधर या राधा- मुरलीधर
दिलों में नहीं बसते,
बाजार में मिलते ...
मोहब्बत में कोई कहेगा क्या
वह तो एक एहसास है
उसे मेहसूस कर लिया
तो मिल गया, नहीं मेहसूस किया
तो भ्रम में जीवन भर भटकता रहा...
प्यार में कोई कुछ लेता नहीं
प्यार देने का ही नाम है
मगर, अगर यह समझ पाओगे
तो यह जरूर देख पाओगे
जिसे सच्चा प्यार मिला है
वह तो धनवान हो गया
और जिसने
दिया वह भी बांटते बांटते कंगाल नहीं
और भी धनवान और महान हो गया...
प्यार कोई रीति रिवाज नहीं,
उसका कोई साझा रंग या रूप नहीं
वह ऐसी रंग है जो एक बार लग जाए
वह चुनरी या तो राधा बना जाए
या मीरा कहलाये...
प्यार तो ऐसी कोई इबादत है,
उस पूजा के थाली में धूप, दीप नहीं रहते
उस में साँसे और रूह की आहुति होती है...
प्यार कोई चांदी या पीतल नहीं
जो आग में जलते ही भस्म हो जाए
यह तो वह खरा सोना है
जो आग में जलते जलते
और शुद्ध हो जाए
कभी याज्ञसेनी तो कभी
सीता बन जाए....
फिर तुम अब क्यों पूछते हो
हमें तुमसे सच में मोहब्बत है या नहीं...
और है तो भी कितना है यह भी...
हम तो आर्यभट्ट के जैसे विद्वान नहीं
शून्य कहाँ से आया और कहाँ जाएगा
इसका गणित तो समझते नहीं
बाएं में रहें तो शून्यता कहलाए
दाहिने में सैकड़ों बनाए
अगर ऊपर रहा सभी फल को मिटाए
एक ही शून्य ही कर जाए
नीचे आया तो अनगिनत संख्या हो जाए....
हमें यह हिसाब किताब से क्या करना
तुम भी उस से दूर रहना...
जब कभी कुछ मासूमियत बिखरने चाहो
कोई हंसी बांट कर हंसना चाहो
या कभी तुम्हें रोने को कोई
कंधा चाहिए
पाँव रखने को भरोसा चाहिए...
हमें बस याद कर लेना...
बेझिझक हमारे यादों के शहर में जाना...
हम हैं ना....
हमेशा की तरह....
मोहब्बत को किसी रोज साँसों में
जोड़ कर देख लेना...
कुछ साँसे जिनके ऊपर थोड़े से
भी हक थे हमारे,
हम आपके लिए वही छोड़ दिए हैं
उन्हें छोड़ आए हैं आप के लिए...
उसको जुबानी कैसे बताये कोई
उसका क्या गिनती करे कोई...
कुछ देर हमारे साथ चलना साया की तरह
वह खामोशी ही आप को बता ही देगी
और वह ज़मीन से आसमान के
तरफ एक नजर देख लेना...
हम तुम्हें वहीँ खडे मिलेंगे
हमेशा की तरह....
अब तो समझ आ गया होगा...
मैं हूँ ना.....
तब से अब तक,
फिर अब से तब तक
मैं हूँ ना....
हमेशा की तरह....
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