आज आईने में झांकी तो दिखाई न दिया ....
जिंदगी जैसे अब धुंधली हो गई है
अब सन्नाटे में वह ढूंढ रही है
वह तस्वीर, वह तसव्वुर को
वह बेमिसाल राह और बेजुबान अंदाज को...
आज बैठे बैठे माजी को परख रहा हूँ
वह रास्ते जहाँ पर भटक गया था
उसी राह को तरस गया हूँ
उसी राह को बेइंतहा तलाश रहा हूँ...
कई रास्ते एक दूसरे से टकराते थे
समझ नहीं आया था किस और जाएं
कौन सा गलत और कौन सी सही है....
शायद वहीँ लडखडा गया
वहीँ यह खयाल को पत्थरों की
लकीर मान लिया होगा ,
जैसे वही अड गया,
मैं सही हूँ,
मैं ही सही हूँ...
यही ठान लिया...
कोई और भी है,
कोई और भी सही है
कई रास्ता सही होते हैं
यह खयाल ही छोड़ दिया...
और शायद वहीँ पर, उसी वक़्त
अपने आपको खो दिया
वह तसव्वुर और तस्वीर भी
वहीँ छुट गया...
चलते चलते ढेरों अजनबी मिले,
कई पानी के बुलबुले जैसे बिखर से गए
कुछ सामने होते हुए भी नजर नहीं आए
मगर वह एक ही तस्वीर थी
जो बिखर जाने के बाद भी वहीँ खड़ी थी...
तलाश रहे थे हम वह पुरानी चेहरा
तसव्वुर से निकल के जो सच हो गया
मन के आईने में जब जब झाँकी
वही तस्वीर दिल की गहराई से उभर आई ....
जो साया के जैसे साथ रहती थी
आईना की तरह सच बोलती थी
और बेइंतहा, बेहिसाब मोहब्बत करती थी
हमें सारे दुनियादारी से आजाद रखती थी....
जिस के भरोसे आसमान से ऊंचे
जिस के दिल की गहराई सागर जैसे
जो धरती जैसी सह भी लेती थी
दिया की तरह हमें राह दिखलाती थी ....
कैसे, क्यूँ, कहाँ, कब हमने उसे खो दिए
वह तस्वीर से हम जुदा हो गए....
सदियाँ बीती, सैकड़ों चेहरे आ कर मिले
मगर वह तस्वीर या तसव्वुर से कोई ना मिले...
ये खुदा,
तेरे दरबार में यह आखिरी दुआ है
हमें आज वही तस्वीर दे दे
वही तसव्वुर के साथ रहने दे ....
जिस को हम पालकों पर बिठाये रखें
तमाम उम्र उसी को ही महफ़ूज़ रखें
अब और कोई आलम नहीं
दे पाओगे तो दे दो मुझे तस्वीर वही....
जो तस्वीर हम जिंदगी भर
तलाशते रहे,
दुआओं में तो वही मांगे थे
फिर भी क्या बदनसीब हैं
समझ ही न पाए...
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