Saturday, 9 August 2025

एक चुटकी नमक

अजीब इत्तेफाक है यह  
आसमान से गिरे बूंदे 
नमकीन नहीं होते 
मगर समुंदर में गिरते ही 
फना  हो जाते 
और चुटकी भर नमक से समा जाते...

कुदरत  भी क्या कमाल है, 
सागर के 
हर एक बूँदों में नमक, 
हर एक लहर में नमक 
और दुनिया के हर एक
 आँसू में भी वही नमक...

शायद यह समुंदर और अश्क में 
कोई गहरा रिश्ता होगा, 
खुशी में भी,  गम में भी 
शायद वह एक जैसा होगा....

कहते हैं समुंदर कभी कुछ लेता नहीं, 
जो कुछ उस में आ भी जाता, 
पलटकर वह अगले लहर में 
उसे किनारे पर लौटा देता...
अश्क भी वही करता, 
सारे दर्द को धो लेता, 
सारे ग़म को पी लेता....


कहते हैं समुंदर के आंखें गहरे हैं, 
देखता तो बहुत कुछ है, मगर  कुछ नहीं कहता,
किनारे पर दो घडी बैठ गया कोई तो, 
साहिल पर उस का इतिहास  लिख देता....
अश्क भी वही करता
बिना कुछ कहे,बिना कुछ पूछे 
कितने कहानी लिख जाता...


लोग कहते हैं 
आँखों में समुंदर होते हैं और 
समुंदर  में आंखों जैसी गहराई 
यह अश्कों में भी नमक 
और समुंदर की हर एक बूँदों में भी वही...

कभी किसी ने समुंदर को 
 सूखते  तो देखा नहीं होगा 
ना ही अश्कों के परछाई...
कोई  यह कह नहीं सकता कितने 
लहरें उठते और मीट जाते हैं 
समुंदर के छाती पर, 
न ही कोई यह  जानता होगा 
आँखों में अश्कों की गहराई....

क्या रिश्ता है यह विशाल सागर और 
एक बूंद गिरी हुई अश्क के अंदर....
शायद वही एक चुटकी नमक का रिश्ता 
दोनों के बीच में होगा, 
दोनों में होगा  एक जैसा ही कोई  खुदाई..






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