परछाई के दामन मे आज फिर कुछ तोहमत लगने लगे,
बर्षों पहले से जो नजारे गुमसुम बैठे हुए थे
वे इस कदर क्यूँ हमें आज ताकने लगे
जैसे कोई पतझड़ में बहार आ गया
मौसम में तो बदलाव न था,
मगर कोई कोयल को संगीत का याद आ गया...
एक कोशिश की इंतजार था,
कोई वादे के उम्मीद न था,
अब कोई वादे की जरूरत भी क्या है
जब साया भी तो हमारे साथ ही है,
आप के अगर यह कोशिश भी नाकाम रहे,
हम आप से न कोई वजह पूछेंगे,
यह आप के लिए भी हमारे हर कोशिश होंगे
अर्से पहले जो वादे किए थे, उसे पूरा करेंगे
अब और कोई वादे के जरूरत ही क्या है
जब हर एक साँस भी एक कोशिश ही तो है...
क्या हुआ जो हम आप के जिद न बन पाए,
यह क्या कम है
अगर हम आप के जिद न सही आदत ही बन गए
हम जैसे थे वे से ही रहें, बिल्कुल न बदल पाए,
न वो जिद, न आदत भी बदल पाए...
पता नहीं हम क्यूँ बदल न पाए,
शायद हम कभी और कुछ रहे ही न थे...
आप को जिन लोगों ने सम्भाले और महफूज रखें,
हम हर वो शख्स के शुक्र गुजर थे,
आप हमारे लिए चिंता न करे
खुदा के बड़ी रहम हम पर हैं
और आप के हर दुआ भी साथ ही है
एक आखिर ख्वाहिश बचा है हमारे
इजाजत हो तो आज आपको बताएं...
अब आप अपने लिए भी थोड़ा जी लीजिए,
हमें अच्छा लगेगा,
कभी याद आये तो भरोसा करना,
सबकुछ जाने के बाद भी,
यही एक हमारे आखिर अमानत है,
हो सके तो
उस से कभी आजमा लेना...
कभी खुदा आप को मिल गए तो
हमारे लिए यही दुआ करना
हम किसी की भरोसा न तोड़े
इतना ही बस रहम करना...
आज जाने की इजाजत दे दो,
फिर कभी किस जहां में तुम से फिर मुलाकात हो जाए तो
वो जिद या आदत बनाने का भरोसा रखना....
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