आप के दुआ आज फिर कैसे
यहां बरसते गए
जिंदगी भर बंद कई दरवाजे
जैसे अचानक खुलते गए....
कुछ साँसे रुक गए,
कुछ लम्हे ठहर गए .....
कुछ आँसू ऐसे बह गए
जैसे सारी जिंदगी की गिले,
शिकवे एक ही लम्हों में धूल गए,
और शायद कुछ बूंदे आंसूं हवा में घुल गए,
कुछ धडकने ऐसे बिखर से गए
और साँसे आज उन्हें तरसने लगे....
यह जमीन और आसमान
खामोश खडे देखते रहे...
शायद आज कुछ वर्ष ही नहीं
जैसे कई जन्म ,
कई सदियाँ पार हो गए...
आसमान से भी कुछ अश्क गिरे,
जमीं से मिलके फना हो गए....
बादलों ने कुछ कह भी न पाए
फिजां भी खामोश देखते रहें....
ये खुदा,
आँखों में अश्क समुंदर हुए
सारे दर्द इस में पिघलने लगे
कैसी है यह कहर आपके
आप की दुआओं को असर यही है...
क्या कहूँ, कैसे कहूँ
किस इबादत से शुक्र करूँ...
आपके तो यही इंसाफ है,
सच्चे दिल की दरबार है
कुछ नज्म लबों पर चुप सी रहें
खामोश आंखें बरसते गए
ये खुदा,
कभी सदियाँ बीते, आप खामोश रहें
और आज एक ही लप्झ में झोली भर गए....
कड़ी दोपहर बीतने लगे
दुआएं आप के बरसते गए
दया के वह सागर आप ही तो हैं
क्या मांगूं आप के दरबार से...
आज सिर्फ और सिर्फ यही दुआ है
थोड़े और आंसू आंखों में दे दें
किसी के पैरों से कुछ धूल मिटा दें....
थोड़े ही साँसों के मोहलत दे दें
किसी के राहों से कांटे हटा दें
और यह अखिर कुछ धड़कन
कीसी के नाम पर यहीं लिख दें
और तेरी दुनिया में वापस लौटे
ये खुदा, आज यही दुआ दें....
....
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