आज के शाम ऐसी खड़ी हो गई
सूरज डूब तो गया मगर जैसे
साँझ उसकी घर की रास्ता भूल गई ...
घर के खिड़कियां तो बंद थे,
दरवाजे पर भी कोई दस्तक नहीं
फ़िर भी चाँद क्यूँ जमीन पर उत्तर आया
अब तो तारे भी उठे ही नहीं...
वादियों में फूल अब भी गुमसुम बैठे हैं
फ़िर फिजायें किस सफर में निकल गए
बागबान अबतक कहीं दूर खडा है
बहार आने को अब तो देर भी है....
अचानक यह हवा में क्यूँ गिली मिट्टी की
खुशबू आने लगी ,
चमन में रात की परछाई भी क्यूँ
यूं ही लहराने लगी
यह शाम भी किसी तसव्वुर में खोने लगी
और यह शहर कई यादों में डूब गया
और खामोशी की वह दौर अर्से के बाद
आज फिर सामने आने लगा
कई सवाल जो मन की गहराई पर
कई बार उठ कर सो गए थे
बर्षों के बाद आज क्यों
उठ कर खडे हुए .....
ज़िंदगी के यह अखिर चंद पल
आप से और हम से कुछ सवाल किए ....
हम ने क्या खोया और क्या पाया !!!
हमें तो बड़ी ताज्जुब हुई,
हर साँस जैसे सवाल किए जा रहे थे और
हर धड़कन उनके हाजिर जवाब दे रहे थे....
आप आए थे आप के लिए,
चाहे भी अपने लिए,
पाए भी अपने लिए
और खोए भी अपने लिए
वहाँ हम कहीं दूर दूर तक नजर ना आए...
हम दूर खडे सोचते रहे
साँसे और धडकनों के बीच
खामोश खडे बातेँ सुनते रहे
बिते लम्हों को तलाशते रहे
कुछ जवाब हम भी ढूँढते रहे....
एक बेबसी ने सवाल किया और
एक खामोशी ने जवाब दिया
एक बेरुखी ने कहता रहा और
एक खयाल ने सुनता रहा
क्या था वह सवाल,
क्या था वह जवाब
कैसी थी वह बेबसी
कैसी थी वह बेरुखी
आसमान के तरफ देखे
तो चांद की रोशनी
हमारी रूह को भिगोने लगे
तारों ने अपनी रोशनी हमें परोसने लगे
चाँद हमे ताकने लगा
चारों ओर सन्नाटा घिरने लगा
आसमान जमीन पर छाने लगा
और खामोश लफ़्ज़ ने कहने लगा...
हम आए तो थे आप के लिए ,
लौट भी गए थे आप के लिए,
अपने को कहीं दूर रखते रहे,
सारे जिंदगी अपने आप को
कहीं नजर ना आए
और आप जब जब फिर वापस आए
सिर्फ और सिर्फ हम वहाँ खामोश
खडें रहें आप के लिए...
फिर किस ओर जहां में
वह चांद और तारों से,
वह खामोशी और बेबसी से
वह जमीन और आसमान से,
यह डूबता हुआ सूरज से
या यह ढलती हुई साँझ से
आप मिले तो अपने सवालों का
जवाब पूछ लेना....
क्या खोया और क्या पाया ?
और यह जवाब किसी और जहाँ में
हमें और हमारे खुदा के साथ साझा करना...
शायद वह पल में
कई जन्मों को ज़ज्बात होंगे
हवा रुक जाएगी और
रात विरान रह जाएगी...
और आसमान और जमीन
हमारे बीच खामोश खडे
देखते रह जाएंगे ....
और आपको और हमें
एक जहाँ से दूसरी जहाँ
ले चलेंगे....
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