कितने सालों पहले से ही बंद हो गई है....
आप को कैसे यह यकीन हो चला था
इस घडी में जो एक पल कैद हो गया
समय वहीँ ठहर गया है ...
इसीलिए आप उसे ठीक नहीं कराए
कितनी अजीब बात है ...
कैसे सोच लिया आप ने
वक़्त एक घडी की कांटों के मोहताज है
घडी बंद हो गई तो वक़्त रुक जाता है
और समय घडी में कैद हो जाता है...
समझाने तो चाहे थे हम बहुत
मगर आप समझे तो सही...
जीवन ना कहीं ठहरा है कभी
ना यह नाव पर रुका है कहीं
यह धार है कुदरत का, नाव क्या
किनारे भी बह जाते हैं यहाँ
ना वक़्त किसी का इजाजत लेता है...
ना समय कभी पीछे मुड़कर देखता है....
हम न चले तो चल देते राहें
अंधी से, तूफान से वे डरते नहीं है
कभी किसी का वक़्त भला रुका है
घडी के कांटों से रिश्ते जोड़ा है !
हो सके तो आज समझ लेना यह बात
वक़्त से पहले या वक़्त के बाद
जो ठहर जाता है
वह वक़्त नहीं कुछ लम्हें होते हैं
शायद जीवन सालों में नहीं
ऐसे कुछ पलों में जिया जाता है...
घडी के कांटों पर नहीं
वक़्त इन्हीं लम्हों में कैद हो जाता है...
जिंदगी सदियों की नहीं
यही चंद लम्हों की मोहताज होती है...
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