चौराहे पर लिखा नेम प्लेट भी
निकल गया
मैंने मेरे दरवाजे से मेरा नाम
भी मिटा दिया
तो आप मुझे कैसे ढूंढ पाएंगे ?
मैंने बर्षों आप की प्रतीक्षा की है
कई बार आप के शहर,
आप के मोहल्ले, आप के गली,
आप के चौराहे और आप के घर के सामने
आई हूँ, आप के
रूह को ढूँढा है मैंने हर बार
मगर मैं आप के आत्मा को
वहाँ नहीं पाया .....
शायद इस लिए की
आप आप के आत्मा को
मुझसे दूर रखना चाहते थे....
इस का क्यूँ और कैसे ,
यह मुझे पता नहीं,
इस का जवाब शायद आप को,
नहीं तो वक़्त या खुदा को पता होगा....
मगर कभी अगर आप
मुझे दिल से ढूँढे
रूह से आवाज दें
कभी अगर आप को मेरी
जरूरत हो,
आप मेरी आत्मा की खोज से निकले....
तो दुनिया की कोई भी शहर,
कोई भी कस्बे, कोई भी चौराहे
कोई भी गली में जाइए,
कोई भी घर में झाँक लीजिए
जहाँ आप को एक मुक्त आत्मा
महसूस होगी ,
जहाँ आप को कोई बेनक़ाब रूह
की साया दिख जाएगा
समझ लेना
वही मेरा शहर, वही मेरा कस्बा,
वही मेरा चौराहा, वही मेरा घर....
वहीँ मुझे ढूंढना,
सारे नकाब, सारे दुनियादारी छोड़ आना
सारे अभिमान, सारे नाराजगी
पगडंडी पर भूल आना...
मैं आप को वहां जरूर मिल जाऊँगी...
इस से अच्छा पता मैं आप को
क्या दे सकती हूँ....
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