Monday, 27 October 2025

घर

दिल में एक घर की तमन्ना थी, 
जिसको आज हम ढूंढ रहे थे...

ढेरों सपने बुने, नक्शे बनाएं 
यादें इकट्ठे किए 
पत्थर काटें,ईंटें जोड़ें 
चट्टानें बनाएं 
छत डालें ....

दिल में एक घर की तमन्ना थी,
जिसको आज हम ढूंढ रहे थे....

बगिचे में खूब गुलाब लगाए 
आन्गन पर दामी लन बनाए
सामने गेट पर सुइस कैमरे 
पोर्च पर संगमरमर चेहरे 
हर तरफ आर सी सी की दीवारें....

दिल में एक घर की तमन्ना थी, 
जिसको हम आज ढूंढ रहे थे....

जापानिज गाड़ियां गराज में 
चाइनीज वास ड्रॉइंग रूम में 
शानदार आर्ट दहलीज पे 
बोहेमियन सानडेलियर बालकोनी पे

दिल में एक घर की तमन्ना थी,
जिसको आज हम ढूंढ रहे थे....

पीछे मोड़ कर देखा,
तो वह घर कहीं नजर नहीं आया 
वह एक मकान ही बन गया था 
जैसे सपनों का वह घर से  मिलों दूर  
एक आलिशान महल वहां खडा था...

दिल में एक घर की तमन्ना थी,
जिसको आज हम ढूंढ रहे थे....

अर्से बीत गये, आंखें वही थे 
मगर सपने बदल गए थे 
चट्टानें  मजबूत तो हुए थे
मगर  वह मासूम आरजू कहीं खो गए  थे

दिल में एक घर की तमन्ना थी,
जिसको हम आज ढूंढ रहे थे....

इत्र के खुशबू से सारे मकान महक रहे थे 
मगर रिश्तों की चाहत कहीं छुट चुके थे 
वह तमन्ना वक़्त के रेत पर थके हारे 
 किसी एक कोने में सो गए थे 

दिल में  एक घर की तमन्ना थी...
जिसको हम आज ढूंढ रहे थे 

हम वहीँ खडे थे, 
मगर 
बर्षों पहले अपनों को, 
और अपने आपको कहीं
छोड़ आए थे....

दिल में एक घर की तमन्ना थी....
जिसको आज हम ढूंढ रहे थे....

घर के दहलीज पर खामोश खडे
दूर कहीं वह आंखें, वह सपने 
वह तमन्नाओं को ढूंढ रहे थे...

दिल में एक घर की तमन्ना थी...
जिसको हम आज ढूंढ रहे थे...


वहां वह घर  नहीं था , 
हम  एक बेजान, आलिशान 
मकान पर खडे हुए थे...

वह मासूम सपनों से मिलों दूर 
वह मकान की छाती  में 
वह घर को तलाश रहे थे...

दिल में एक घर की तमन्ना थी,
जिसको हम आज ढूंढ रहे थे....







No comments:

Post a Comment