ठीक ही तो था
कहीं कुछ भी कमी
नजर नहीं आया था....
फिर अचानक कैसे
सबकुछ बदल गया
सबकुछ ठीक होते हुए भी
जैसे कहीं कुछ बिगड़ गया
सबकुछ ठीक होते हुए भी
कहीं कुछ भूल हो गई,
शायद कुछ गलत हो गया
शायद बनते बनते कहीं कुछ टूट गया था ....
तमाम साल, महीने, सदियाँ बीत गए
सन्नाटे में सैकड़ों बार अपने आप से बातें की
रेगिस्तान से समुंदर तक ढूंढती रही
एक जवाब, एक ही जवाब
भूल कहाँ हो गई.....
सबकुछ ठीक तो था
फिर भूल कैसे हो गई....
क्यों बना हुआ दुनिया बिखर सी गयी
हर ईंट में चट्टानों की मजबूती थी
फिर वह घर तास के पत्तों की तरह
क्यूँ धस गया , मिट्टी में मिल गया
सबकुछ होते हुए भी
कैसे, कहां कुछ कमी रह गयी???
अर्से बीते, वह टूटे हुए सपने
जुड़े तो नहीं, मगर खामोश हो गए
आईना जो टूट गए थे, नए तो नहीं हुए
मगर सवाल करना छोड़ दिये
जो आँसू, रुकते नहीं थे
वे अब चुप हो गए
जो मन बहुत से सवाल पूछता था,
हर सवाल के जवाब तलाश कर रहा था,
वह अब बिना जवाब से ही समझदार हो गया..
भूल कहाँ हो गई,
किस से हो गयी
मुझसे भूल हो गई
या आपसे
भूल हालात से हो गई
या हम दोनों से हो गई?
आज भी यह सवाल सवाल हो कर रह गया...
मगर बात वहां नहीं रुकी
ऊपर से कोई आवाज आई....
किसी ने तो अखिर माफी मांग ली
और जैसे किसी ने माफ कर दिया...
भूल किस का था
यह नहीं पता
क्यूँ हो गया
यह भी नहीं पता
कैसे, कब ऐसी भूल हुई
यह भी नहीं पता...
मगर शायद मैंने ही माफी मांग लिया
सब से पहले अपने आप से
फिर आप से
फिर हम दोनों से
और अखिर हालात से...
कभी सोचा है यह फिर कैसे हुआ ?...
यह भी नहीं पता था
भूल किस की थी
फिर मैंने माफी क्यों और कैसे मांग ली?
शायद मेरे आँसू आप को न सही
खुदा को मेहसूस हो गया
उनका मन को कहीं धो लिया
मेरी कुछ सच्चाई उन्हें पिघला दिया...
वह एकदिन अचानक आसमान से
ज़मीन पे उतरे, मुझे अपने कंधों पर उठा लिए और सारे आंसू पोंछ दिए और कहे
"माफ़ करने और माफी मांगने से
बड़ा कुछ नहीं होता है....
क्यों ढूँढते हो भूल कैसे हो गई
क्यों हो गई, और किस से हो गई
यह सब मत पूछो अब, केवल
माफी मांग लो ...उन से, हालात से,
खुदा से, अपने आप से...
किसी और ने नहीं मांगी तो क्या हुआ,
खुद के लिए माफी मांग लो
उनके तरफ से भी मांग लो
दोनों के तरफ से भी माफी मांग लो"
और शायद उसी पल, उस घडी
खुदा से दुआ की बारिश हो गई
और मेरे सारे सवाल मिट गए,
यकीन हो गया माफी मांगना जैसे कोई पूजा है
और माफ़ करना कोई इबादत....
माफी मांगने वाले और माफ़ करने वाले
दोनों ही बड़े नसीब वाले होते हैं
खुदा के दुआ के हकदार होते हैं....
और मैंने आप को, हालात को
अपने आप को माफ़ कर दिया...
खुदा मुस्कुराते हुए मेरे
हाथ में हाथ थामे,
मेरे रास्ते पर एक सुकून की दिया जलाए
और फिर जमीन से आसमान के लिए
रवाना हो गए,
मगर वे जो माफ़ी की दिया जलाए
वह सदियों से मेरा, आप का और
पूरी दुनिया के कितने रास्ते को रोशनी दी
और उसी वक़्त दुनिया जन्नत हो गई...
No comments:
Post a Comment