Monday, 20 October 2025

शर्त

सासों पे शर्त, आँखों पे शर्त 
धडकनों पे शर्त,कदमों पे शर्त....

ये खुदा,
ये कैसी है तेरी खुदाई, तू ही बता
मैं तो तेरा ही गुलाम, तेरा ही बंदा
कैसा है यह जिंदा रखने का अंदाज तेरा 
हर कदम मेरी शर्त और शर्त से भरा.....

जीने पे भी शर्त 
मरने पे भी शर्त 
उंगलियों पे शर्त 
अंगूठे पर शर्त 
चिट्ठियों पे शर्त 
ज़ुबानों पे भी शर्त 
ज़ज्बात पर शर्त 
खामोशी पर भी शर्त....

खो जाने पे शर्त 
मिलने पे भी शर्त 


शर्त ही शर्त 
हर घडी,हर मोड़ 
हर पल, हर पग
सिर्फ शर्त ही शर्त....

वाह ! रे खुदा, 
कैसी है तेरी दुनिया 
और कैसे इन्साफ, कैसी तजुर्बा 
कैसी है तेरी खुदाई और दुआएं यहाँ....

ये खुदा, 
तू  ही बता 
यह जिंदगी  है या है तेरा कोई नया मक़सद  
समझ नहीं आया यह तेरी अदा का शतरंज..

ये खुदा तू ही बता 
यह कैसी दुआ की बारिश है तेरी 
क्या है भूल और क्या खता है मेरी.... 

ये खुदा, 
तू ही बता....
कैसे जी पाती 
यह शर्तें जिंदगी 
कैसे निभाता कोई 
ऐसी मोहब्बत ,ऐसी खुदाई....

ये खुदा, 
तू ही बता 
यह था मोहब्बतें शर्त तेरी 
या शर्तें मोहब्बत कोई....

कलियों पर शर्त 
चमन पर शर्त 
तारों पे शर्त 
चण्द्रमा  पर भी शर्त 

रात पर शर्त 
सेहर पे भी शर्त 
तितलियों पे शर्त 
भौरों पे भी शर्त....

थोड़े ही साँसे बाकी है, 
थोड़े ही धड़कन बचे हैं 
आखिर पडाव है मेरे खुदा 
तूने दे दिया है हर शर्त की दुआ 
मकसद तेरा पूरा हो गया
मौत भी खडी है यहां  देखता हुआ 

पहला और आखिरी  यह एक शर्त है मेरा 
खुद एक बार खुदाई से तू बाहर तो आ जा 
मेरी नजरिए में खुद को तरस जा 
खुद्दारी तेरा वहीँ छोड़ के  आ जा...

ये खुदा, 
मेरी एक ही ख्वाईश है आखिरी साँस से
एक ही शर्त, एक  ही अर्जी है तेरे दरबार पे

एक बार, सिर्फ एक बार तू आसमान से 
ज़मीन पे उतर  के आ जा 
सिर्फ एक दिन,सिर्फ एक ही बार
 तू  जी ले मेरे जैसा 
और मुझे एक बार ही जीने दे 
निसर्त, बेबाक, बेहिसाब ,तेरे जैसा 
साँस लेने दें अपनी मर्जी से 
मोहब्बत कर लेने दें अपने आप से 
शायद  तू  तभी समझ पाएगा 
खुदा की खुदाई पर ना सही 
तू भी हो जाएगा  फिदा 
देख कर तेरी ही अपनी अदा...

यह खुदा, तू ही बता 
सोच लें यह अदा, 
यह इंसाफ तेरा होगा 
सब से अलग और सब से जुदा...





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