Friday, 24 October 2025

क़ीमती तोहफ़ा

सुना है इस साल आप इस शहर में होंगे 
शायद तब मेरी सालगिरह की वक़्त होगा 


इतने साल के बाद फिर कुछ याद आ गई 
कुछ बीते हुए लम्हें ताजा हो गए 
कुछ खुशियां,  कुछ मायूसी 
बेफिक्र सामने खडे हो गए 

अर्सा बीत गया, मगर कुछ यादें 
बिल्कुल वेसे को वैसे ही  हैं
दुनिया के दस्तूर और समय के सैलाब भी 
उन्हें धुँधला नहीं कर पाए हैं...

एक सालगिरह याद आयी 
जिस दिन आप ने मुझे एक अजीब सी
तोहफ़ा दे दी थी....
कुछ वापस लेने की तोहफा..
अजीब इत्तफाक था वह  ....और 
अजीब  ताल्लुक़ है वह उस दिन से,
उस एक ही सालगिरह से मेरी 
कोई और सालगिरह ऐसे कोई तोहफा
लेकर कभी आयी नहीं...

बर्षों लगे समझने को 
कोई किसी अजीज के सालगिरह पर 
यह किस तरह तोहफा दिया...

"कुछ वापस लेने का"...

हर साल मेरी सालगिरह आती है, 
ढेरों लोग मुझे आशीर्वाद दे जाते हैं 
उस साल भी सभी ने मुबारक बात दी 
मेरी शुभकामनाएँ की 
माँ ने मेरे लिए मंदिर में दिया जलाई 
सब ने मेरे लिए दुआ मांगे 
मैं खुश रहूं, बेहद खुश...

किस्मत ने तो मुझे खूब आशिर्वाद दी है 
कभी बेसुमार आजादी से तो कभी 
किसी के बेमिसाल की समझ से ...
कभी रास्ता आसान करते हुए तो कभी 
मंज़िल मुकम्मल करते करते
कभी अचानक रेगिस्तान में
बारिश की मौसम भी लाके....
शुक्रगुजार हूँ मैं उसके
इस जिंदगी भर के लिए ही नहीं, 
यह जिन्दगी के बाद भी....

मैं हमेशा खुश नसीब रही 
हर सालगिरह मेरी अनगिनत लोगों के 
दुआओं से चहकते रहें हैं 
हमेशा की तरह ,आज भी रही...
मगर आज तक वह  एक ही उलझन 
उलझन ही रह गई 
वह एक की सालगिरह के पहेली 
अब भी  सुलझा ही नहीं....

आप ने मुझे ऐसे तोहफा क्यूँ दिया था...
वह आशीर्वाद  या कोई श्राप था..
वह आपके दुआ थी 
या आपने कोई मन्नत मांगी थी..
नहीं पता ....  यह सोचते सोचते 
बहुत वक़्त बीत गया है...

आप को याद होगा की नहीं 
यह भी मालूम नहीं 
आप ने ऐसे क्यूं किया था
यह भी  पता नहीं, 
उसका जवाब आज भी 
आप के पास है या नहीं, 
वह भी पता नहीं...

मगर मुझे इतना पता है 
आज मुझे यह सब आपसे 
पूछना भी नहीं...
जानना भी नहीं...

हो सके तो मेरे इस सालगिरह में 
मेरे लिए मन के अंदर एक दिया जला लेना..
अपने आप के साथ कुछ लम्हें गुजार देना 
अपने बालकोनी में खडे होकर 
किसी तारे के तरफ देख लेना 
और मेरे लिए दो मिनट के 
वक़्त निकाल कर दुआ कर लेना...
शायद उस में आपको समझ भी आ जाएगा 
किसीको कुछ "वक़्त " देना ही सबसे सुंदर, सबसे क़ीमती, सबसे अजीज तोहफा है...
शायद उस लम्हों में आप मुझे 
कहीं बेहतर समझ पाएंगे, 
और मेरी सालगिरह  भी
जरूर बेहतर गुजर जाएगी....

No comments:

Post a Comment